क्या आप जानते है?… भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के बारेमें ये बाते

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई शहर में स्थित है। यह भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत नाभिकीय विज्ञान एवं अभियांत्रिकी एवं अन्य सम्बन्धित क्षेत्रों का बहु-विषयी नाभिकीय अनुसंधान केन्द्र है।। बार्क बहुविषयक अनुसंधान केंद्र है। इसमें परमाणु वित्रान, इंजीनियरिंग और उससे संबंधित क्षेत्रों के पूरे स्पेक्ट्रम को कवर करने हेतु उन्नत अनुसंधान और विकास के लिए व्यापक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। भारत का परमाणु कार्यक्रम डॉक्टर होमी जहाँगीर भाभा के नेतृत्व में आरम्भ हुआ। 3 जनवरी सन् 1953 को परमाणु ऊर्जा आयोग के द्वारा परमाणु ऊर्जा संस्थान के नाम से आरम्भ हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 20 जनवरी सन् 1957 को राष्ट्र को समर्पित किया गया।
इसके बाद परमाणु ऊर्जा संस्थान को पुनर्निर्मित कर 12 जनवरी सन् 1967 को इसका नया नाम भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र किया गया, जो कि 24 जनवरी सन् 1966 में डा॰ भाभा की विमान दुर्घटना में आकस्मिक मृत्यु के लिये एक विनम्र श्रद्धांजलि थी

डॉ. होमी जहांगीर भाभा स्वप्नदृष्टा थे जिन्होंने भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होंने मुटठीभर वैज्ञानिकों की सहायता से मार्च 1944 में भारत में नाभिकीय विज्ञान में अनुसंधान का कार्यक्रम प्रारंभ किया। उन्होंने नाभिकीय ऊर्जा की असीम क्षमता एवं उसकी विद्युत उत्पादन एवं सहायक क्षेत्रों में सफल प्रयोग की संभावना को पहचाना। डॉ. भाभा ने नाभिकीय विज्ञान एवं इंजीनियरी के क्षेत्र में स्वावलंबन प्राप्त करने के लक्ष्य से यह कार्य प्रारंभ किया और आज का परमाणु ऊर्जा विभाग जो विविध विज्ञान एवं इंजीनियरी के क्षेत्रों का समूह है, डॉ. भाभा की दूरदृष्टि का परिणाम है। डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन के लिए एक व्यवहार्य वैकल्पिक स्रोत में उच्च क्षमता को पहचानते हुए मार्च, 1944 में भारतीय नाभिकीय कार्यक्रम प्रारंभ किया। यह डॉ. भाभा की दूरदृष्टि ही थी जिसके कारण भारत में नाभिकीय अनुसंधान को उस समय प्रारंभ किया जब ओटो हान एवं फ्रिट्ज स्ट्रॅसमैन द्वारा नाभिकीय विखंड़न के चमत्कार की खोज की जा रही थी एवं तत्पश्चात एन्रिको फर्मि व साथियों द्वारा अविच्छिन्न नाभिकीय शृंखला अभिक्रियाओं की व्यवहार्यता के बारे में रिपोर्ट किया गया। उस समय बाहरी विश्व को नाभिकीय विखंडन एवं अविच्छिन्न श्रृंखला अभिक्रिया की सूचना न के बराबर थी। परमाणु ऊर्जा पर आधारित विद्युत उत्पादन की कल्पना को कोई मान्यता देने के लिए तैयार नहीं था। डॉ. भाभा एक कुशल वैज्ञानिक और प्रतिबद्ध इंजीनियर होने के साथ-साथ एक समर्पित वास्तुशिल्पी, सतर्क नियोजक एवं निपुण कार्यकारी थे। वे ललित कला एवं संगीत के उत्कृष्ट प्रेमी और लोकोपकारी थे। डॉ. भाभा द्वारा भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के प्रति अपनाया गया सही मार्ग विश्व के बेहतरीन स्तरों में से एक है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सदस्यों और सारे देश के लोग इस महान वैज्ञानिक को नमन करते हैं और आने वाले वर्षों में भी उनके द्वारा चुने गए मार्ग पर चलने की पुन: प्रतिज्ञा करते हैं
भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र द्वारा मूलभूत प्रयोगशाला बेंच स्केल अनुसंधान से लेकर संयंत्र प्रचालन तक व्यापक वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी गतिविधियों तक व्यापक सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसकी कार्यात्मक गतिविधियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – पारंपरिक विचारों से लेकर नवोदित क्षेत्रों तक सभी विषय शामिल हैं। इस संस्था का मूल अधिदेश है – विद्युत उत्पादन तथा नाभिकीय ऊर्जा के शंतिमय प्रयोग हेतु आवश्यक सभी अनुसंधान एवं विकास सहायता प्रदान करना। इसमें पेरिफरल कंपोनेन्ट्स, कंप्यूटर जनित कार्यशील प्रतिरूपों को तैयार करना तथा अनुकारित रिएक्टर प्रचालन की अवस्था में उनका मूल्यांकन, एकीकरण, चयन एवं रिएक्टर प्रचालन, पर्यावरण के विपरीत परिस्थितियों में जोखिम हेतु पदार्थों और घटकों का परीक्षण, नए रिएक्टर ईंधन पदार्थों का विकास एवं जांच आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र द्वारा भुक्तशेष ईंधनों का रासायनिक संसाधन, नाभिकीय अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान के साथ-साथ उद्योग चिकित्सा एवं कृषि के क्षेत्रों में नए आइसोटोप अनुप्रयोग प्रौद्योगिकियों का विकास आदि के लिए निपुणता प्रदान की जाती है। भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र में भौतिकी, रसायनिकी एवं जैविक विज्ञानों में प्रगत अनुसंधान कार्य को तीव्रता से आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है ताकि देश को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया जा सके।[1]

विशेषताएं
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र एक बहुमुखी संस्था है जहाँ स्वगृहे किये गये अनुसंधान के परिणामों को विकासशील स्तर तक स्थानांतरित कर अतंत: सफलतापूर्वक निदर्शनों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है। प्रगत उपस्कर एवं यंत्र, सुचारू रूप से स्थापित प्रयोगशालाएं अनुकूल परिस्थिति तथा विज्ञान एवं इंजीनियरी के सभी क्षेत्रों से निपुणता की उपलब्धता भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विशेषताएं हैं जो देश को ज्ञान एवं विकास के नये क्षितिजों की ओर ले जाने के लिये प्रतिबद्ध हैं।

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